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उदारवादी चरण उदारवादीयों की मुख्य मागें उग्रवादी चरण उग्रवाद के उदय का कारण तात्कालिक अंतराष्ट्रीय घटनाये कर्जन की प्रतिक्रियावादी नीति

                            

आज का आर्टकिल आप के Exam के Point of view and Pattern को देखते हुए है आज इसमे important point को प्रस्तुत किया जा रहा है।  जो आप के Exam के लिये  most important हो सकता है।  


                         उदारवादी चरण


प्रारम्भिक समय में काग्रेस का लक्ष्य भारत के विभिन्न भागों में राष्ट्रवादी लोगो के बीच एक जागरूक संबंध को बढावा देना था।  देश में जनमत का प्रतिक्षण और संगठन के महत्व को बताना भी इनके लक्ष्य में शमिल था।

  

                             उदारवादीयों की मुख्य मागें


1- प्रशासन में लोकप्रिय नेताओं की भागीदारी

2- सिविल सेवा में भारतीयों को अधिक अवसर

 3- न्यायीक और कार्यकारणी प्रशासक को अलग करना

 4- स्वराज की स्थापना करना

5- सार्वजनिक कोष पर भारतीय नियंत्रण की माग करना

6- सैनिक खर्चे में कटौती करना

7- प्रशासनिक सेवा के उच्चतर पदों पर भारतीयकरण करना आदि शामिल था।  

जब की इनके कार्यक्रम में कानून के दायरे में रहकर अहिंसक और संविधनिक आंदोलन चलाना मुख्य विचार था।  


उदारवादी नेता पश्चिमी शिक्षा प्राप्त थे ब्रिटिश न्याय पालिका में उनकी गहरी आस्था थी।  अपने अपने पेशे डा0 वकिल में प्रसि़़द्ध होने के कारण राजनीति इनके लिए द्वितीयक पेशा थी।  प्रांरभिक समय की जनता बहुत अधिक जागरूक नहीं होने के कारण भी इनकी राजनीतिक शैली उदारवादी थी। 

 

इसलिए उदारवादी नेताओं ने आग्रह निवेदन प्रथनापत्र शिष्ट मण्डल स्मरक पत्र जैसे माध्यमों का सहायता लेकर काग्रेस के मांगो को अंग्रेजो के समक्ष रखने का प्रयास किया।  


इस समय के महत्पूर्ण उदारवादी नेताओं में


1- बदरूद्दीन तैयवजी

2- फिरोजशाह मेहता

3- डब्लु सी बनर्जी

4- महादेव गोविंद राडाद



                        उग्रवादी चरण


राष्ट्रीय आंदोलन के इस चरण को नव राष्ट्रवाद या उग्रवाद के उदय का काल माना गया इसी समय स्वदेशी आंदोलन तथा क्रांतिकारी आतंकवाद की शुरूआत हुई।  

कांग्रेस के प्रारम्भिक उदारवादी नीतियों से उग्रवादी कहे जाने वाले नेताओं का शीघ्र ही मोहभंग हो गया और उन्होंने कांग्रेस के उदारवादी नेताओं की अनुनय विनय की प्रवृत्ति को राजनीतिक भिक्षावृत्ति की संज्ञा दे डाली।  


कांग्रेस के उग्रवादी कहे जाने वाले नेताओं में प्रमुख थे बाल गंगाधर तिलक महाराष्ट्र अरविन्द घोष और विपिन चंद्रपाल बंगाल लाला लाजपतराय पंजाब।  


उग्रवाद के उदय का कारण


ब्रिटिश सरकार द्वारा उदारवादी लोगो की उपेक्षा करना

अकाल प्लेग से बचने के लिए अंग्रेजो के द्वारा सफल प्रयास नहीं


तात्कालिक अंतराष्ट्रीय घटनाये



1896 में इटली का अफ्रीकी अबीसीनियायी देश द्वारा पराजित होना।

1905 में जापान द्वारा रूस को पराजित कर देना आदि ने कांग्रेस के एक गुट को देश की स्वतंत्रता के लिए उग्रवादी नीति अपनाने को प्रेरित किया।  


कर्जन की प्रतिक्रियावादी नीति


बंगाल विभाजन

विश्वविद्यालय अधिनियम





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