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होमरूल लीग आंदोलन

होमरूल लीग आंदोलन


16 जून 1914 को तिलक आठ वर्ष कारावास के बाद जेल से रिहा के बाद भारत लौटे तो भारतीय राष्ट्ीय कांग्रेस के एकता के लिए इन्होने कार्य करना प्रारम्भ कर दिया क्योंकि 1915 में फिरोजशाह मेहता की मृत्यु हो चुकि थी।  साथ ही कलकत्ता के भोपेन्द्र नाथ जैसे नरमपंथी नेता किसी भी साधन को स्वीकार करने के लिए तैयार थे।  जो कांग्रेस को तात्कालीक दलदल से निकाल सके।  

इसी समय थियोसोफिकल नेता एनी बेसेन्ट भारतीय राजनीति में एक प्रभावशाली स्थिति में स्थापित हुयी और तिलक भी थे इन दोनों नेताओं ने  मिलकर भारत में होम रूल लीग आंदोलन चलाने का र्निणय लिया तिलक का होम रूल लीग अप्रैल 1916 से माना जाता है।  

जबकि एनी बेसेन्ट ने अपने होमरूल आन्दोलन का प्रारम्भ सितम्बर 1916 में किया था।  

एनी बेसेन्ट ने अपना मुख्यालय मद्रास के अडयार को बनाया और जार्ज अरूं डेल को होमरूल लीग संगठन का महासचिव बनाया।  एनी बेसेन्ट के सहयोगियों में वी.पी.वाडिया मजदूर नेता तथा सी.पी.रामास्वामी शामिल थे।  

एनी बेसेन्ट दो समाचार पत्रों का प्रकाशन करती थी जो न्यू इण्डिया और कामनवील था।  तिलक के दो पत्र मराठा एंव केसरी था।  

तिलक और एनी बेसेन्ट ने मजबूती से अपने आन्दोलन को चलाने का प्रयास किया अंग्रेजो ने एनी बेसेन्ट  की मॉंग को रातों रात मान लिया इसलिए एनी बेसेन्ट ने अपने आन्दोलन को स्थगित कर दिया।  

इस आन्दोलन के समय एनी बेसेन्ट ने कहा था की मैं वेताल के तरह पूरे देश को जगाने की कोशिश कर रही हूॅ।  

एनी बेसेन्ट और तिलक दोनो के सर्मथक एक दूसरे को पसंद नहीं करते थे।  इसलिए अलग अलग होम रूल आंदोलन चलाया गया था।  एनी बेसेन्ट का होमरूल आन्दोलन अखिल भारतीय स्तर का था।  

एक प्रकार से होमरूल लीग आन्दोलन अपने मकसद में सफल नहीं हो सका।  


लखनउ समझौता 1916

1916 में कांग्रेस के लखनउ अधिवेशन में कांग्रेस के दोनो घटक नरम पंथी तथा गरम पंथी फिर से एक हुए इस समय तक फिरोज शाह मेहता और गोपाल कृष्ण गोखले दोनों लोगो की मृत्यू हो गई थी।   

तिलक और एनी बेसेन्ट ने नरम दल और गरम दल दोनो को एक मंच पर लाने में एक मजबूत प्रयास किया था।  

कांग्रेस का लखनउ अधिवेशन की अध्यक्षता अंबिका चरण मजूमदार ने किया था।  ये दो घटनाओं की द्वष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण रहा।  

लखनउ अधिवेशन की दो महत्वपूर्ण घटनायें थी उग्रवादियों को जिन्हें पिछले नौ वर्ष से कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया था का एक बार फिर कांग्रेस मे पुनर्प्रवेश तथा कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच ऐतिहासिक लखनउ समझौता।  

लखनउ में अपने पुराने मदभेद भुला कर कांग्रेस एवं मुस्लिम लीग ने साफी राजनीतिक मागें रखी।  प्रथम विश्व युद्व और दो होमरूल लीग आन्दोलन के कारण जब देश में एक नई भावना पेदा हो रही थी तो वैसे में कांग्रेस और लीग का चरित्र भी बदल रहा था।  इस दौरान अलहिलाल और कामरेड जैसे समाचार पत्रों को बन्द कर दिया गया।  

ब्रिटिश सरकार ने अली बन्धुओं मु0 अली और शौकत अली हसरत मोहानी जैसे नेताओं को नजरबन्द कर दिया गया था।  

कांग्रेस ने मुस्लिमों के प्रथम र्निवाचन मण्डल को स्वीकार कर लिया।

हिन्दू मुस्लिम के द्वष्टि से लखनउ समझौता एक महत्वपूर्ण योजना  था किन्तु दुर्भाग्य इसमें अलग अलग चुनाव मण्डल के घातक सिद्धान्त को शामील किया गयां  

तिलक ने यहीं पर नारा दिया था स्वराज हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है।  

मदन मोहन मालवीय ने लखनउ समझौते के विरोधी थे।  

1917 में कलकत्त के वार्षिक अधिवेशन में एनी बेसेन्ट को काग्रेंस का अध्यक्ष निर्वाचित किया गया एनी बेसेन्ट काग्रेंस की पहली महिला अध्यक्ष र्निवाचित हुयी थी।  



 


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